रुद्रपुर, देवरिया मई की शुरुआत में मौसम भले सामान्य रहा हो, लेकिन अब चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। हीट वेव का असर लगातार बढ़ रहा है। तेज धूप और गर्म हवाओं से आदमी ही नहीं, पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। सरकार गर्मी से बचाव और सतर्कता के निर्देश दे रही है, लेकिन रुद्रपुर नगर में आमजन की सुविधा के लिए एक भी प्याऊ नजर नहीं आ रहा है।
धूप आग उगल रही, लेकिन प्यास बुझाने का इंतजाम नहीं
पिछले दो-तीन दिनों में मौसम ने अचानक करवट ली और तापमान के साथ गर्मी का प्रकोप भी तेजी से बढ़ गया। दोपहर के समय सड़कों पर निकलना चुनौती बन गया है। राहगीरों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है, लेकिन नगर में एक भी सार्वजनिक प्याऊ की व्यवस्था नहीं है।
समाजसेवा के दावे बहुत, लेकिन मैदान में कोई नहीं
नगर में कई समाजसेवी संस्थाएं और लोग समाज सेवा के बड़े-बड़े दावे करते हैं तथा सुर्खियों में बने रहते हैं, लेकिन भीषण गर्मी के इस दौर में अब तक किसी ने सार्वजनिक प्याऊ लगाने की पहल नहीं की। ऐसे समय में जरूरत प्रचार की नहीं, बल्कि लोगों की प्यास बुझाने की है।
वाटर कूलर और आरओ प्लांट बने शोपीस!
जानकारी के अनुसार वर्षो पूर्व नगर पंचायत आधा दर्जन स्थानों पर वाटर कूलर लगाए गए थे, लेकिन वर्तमान में सभी खराब पड़े हैं। यही हाथ तहसील में ट्रस्टी राम अवतार केडिया द्वारा लगाये गये आरो प्लांट खराब पड़ा है जब कि जिम्मेदारी देखभाल की नगर पंचायत की है हाल मे ही नगर पंचायत द्वारा लाखो खर्च कर तहसील और रामजी सहाय पीजी कॉलेज में आरओ प्लांट लगाए गए, मगर उनका लाभ आम राहगीरों तक नहीं पहुंच पा रहा है। स्थिति यह है कि पूरे नगर में जनता के लिए एक भी सक्रिय प्याऊ उपलब्ध नहीं है।
हैंडपंप भी गायब, फिर भी मरम्मत के नाम पर खर्च!
आधुनिकता की दौड़ में नगर के कई चौराहों से हैंडपंप भी गायब हो गए हैं। पहले लगे इंडिया मार्का पंप हटाए जा चुके हैं, लेकिन मरम्मत और रखरखाव के नाम पर खर्च होने की चर्चा अब भी जारी है।
जनता की मांग: प्रमुख चौराहों पर लगे प्याऊ
नगरवासियों का कहना है कि बस स्टैंड, बाजार, अस्पताल और प्रमुख चौराहों पर तत्काल प्याऊ की व्यवस्था की जाए, ताकि भीषण गर्मी में राहगीरों को राहत मिल सके।
जनहित का सवाल
जब हीट वेव को लेकर अलर्ट जारी हैं, तो नगर में पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव आखिर क्यों? अब देखना होगा कि जिम्मेदार इस ओर कब ध्यान देते हैं।

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