रुद्रपुर, देवरिया। दोआबा क्षेत्र को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण रुद्रपुर-पिड़रा मार्ग पर स्थित गोर्रा नदी के पिड़रा पुल का कटा हुआ एप्रोच चार वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाया जा सका है। मानसून सिर पर होने के बावजूद एप्रोच पर स्थायी मरम्मत एवं बोल्डर पिचिंग का कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे क्षेत्रीय लोगों में चिंता और आक्रोश व्याप्त है।
वर्ष 2022 में आई भीषण बाढ़ के दौरान पिड़रा पुल का एप्रोच आधे से अधिक हिस्से में कट गया था। उस समय तत्कालीन जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह एवं तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डॉ. श्रीपति मिश्र ने संयुक्त निरीक्षण कर संबंधित विभागों को कटान रोकने तथा तत्काल मिट्टी भराई कराने के निर्देश दिए थे। विभाग द्वारा अस्थायी मरम्मत पर लाखों रुपये भी खर्च किए गए, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल सका।
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में कटान का खतरा बढ़ जाता है और सुरक्षा की दृष्टि से भारी वाहनों का आवागमन रोकना पड़ता है। इसके बावजूद चार वर्षों में न तो बोल्डर पिचिंग का कार्य कराया गया और न ही कटान रोकने के लिए कोई प्रभावी योजना लागू की गई।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद, मंत्री, विधायक तथा विधान परिषद सदस्यों द्वारा समय-समय पर स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए जाते रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
अतिरिक्त पायों का प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में
जानकारी के अनुसार, पचलड़ी की ओर पुल के तीन अतिरिक्त पाये (पिलर) बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था और इसका सर्वे भी कराया गया था। हालांकि लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी इस योजना की प्रगति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
ग्रामीणो ने की स्थायी समाधान की मांग
क्षेत्रीय लोगों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि मानसून के दौरान किसी संभावित दुर्घटना और मार्ग बाधित होने की स्थिति से बचने के लिए पिड़रा पुल के कटे एप्रोच पर शीघ्र बोल्डर पिचिंग कराई जाए तथा पुल सुरक्षा की दीर्घकालिक योजना को अमल में लाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आगामी बाढ़ में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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