वहीं नगर पंचायत पक्ष का तर्क है कि भवन पूरी तरह तैयार होने के बाद उसका विधिवत शुभारंभ कर कार्यालय का संचालन शुरू किया गया। इसी क्रम में विधान परिषद सदस्य डॉ. रतनपाल सिंह की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भवन का उद्घाटन किया गया। उनका कहना है कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका उद्देश्य जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
उधर, स्थानीय विधायक के उद्घाटन समारोह में शामिल न होने और उन्हें आमंत्रित किए जाने अथवा न किए जाने को लेकर भी सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। समर्थक इसे जनप्रतिनिधि के सम्मान से जोड़ रहे हैं, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि कार्यक्रम को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है। हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक विवाद या शिकायत सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विकास कार्यों के श्रेय को लेकर होने वाली ऐसी सियासी खींचतान चुनावी माहौल में और तेज हो सकती है।
5 साल में नवनिर्मित कार्यालय बनकर तैयार होना यह भी चर्चा का विषय
जानकार लोगों का कहना है कि किसी भी टेंडर का एक समय सीमा तय होता है वर्ष 2021 का टेंडर भवन आज बनकर तैयार यह जांच का विषय हैनियम में शर्तों के मुताबिक कार्य दायी संस्था को नोटिस जारी कर ब्लैक लिस्ट में डालना चाहिए लेकिन नगर पंचायत द्वारा ऐसा नहीं किया गया



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