रुद्रपुर देवरिया। पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र कन्हौली में भारतीय खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण पहल आकार ले रही है। एसएसएआईटी (SSAIT) की ओर से स्थापित किया जा रहा एक्सिस बैंक संजीव सिंह ओलंपिक आर्चरी सेंटर ग्रामीण क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण अंचल की प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें प्रशिक्षण, शिक्षा, खेल विज्ञान और विश्वस्तरीय सुविधाओं के माध्यम से ओलंपिक पदक की दौड़ तक पहुंचाना है।
प्रस्तावित केंद्र को भारत का पहला पूरी तरह एकीकृत ग्रामीण ओलंपिक-मानक खेल केंद्र बनाने की परिकल्पना की गई है। यहां प्रतिभाओं की पहचान से लेकर उनके प्रशिक्षण, शिक्षा, आवास और उच्च प्रदर्शन की तैयारी तक की सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्र में ओलंपिक स्तर के इनडोर और आउटडोर तीरंदाजी रेंज, हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग, स्पोर्ट्स साइंस, प्रदर्शन विश्लेषण, आवासीय सुविधाएं और शिक्षा को एक साथ जोड़ा जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए दूर-दराज के शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
ग्रामीण भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं संजीवा सिंह
केंद्र की स्थापना से जुड़े संजीव सिंह के अनुसार, ग्रामीण भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं, खेल विज्ञान, शिक्षा और आवासीय व्यवस्था घर से दूर होने के कारण अनेक प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पातीं। इसी समस्या को दूर करने के उद्देश्य से इस केंद्र की परिकल्पना की गई है।
ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित संजीव सिंह ने कहा कि यह परियोजना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है। खिलाड़ी और प्रशिक्षक के रूप में उन्होंने खेल प्रतिभाओं के संघर्ष को करीब से देखा है। उनका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को ऐसी व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जहां उनकी प्रतिभा को तराशकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए तैयार किया जा सके।
इस परियोजना में एक्सिस बैंक के साथ एसएसएआईटी की साझेदारी है। इसके अलावा एसबीआई फाउंडेशन, ओएनजीसी, इंडियनऑयल, एसटीसीआई फाइनेंस लिमिटेड, एम3एम फाउंडेशन तथा आशा एंड सज्जन अग्रवाल फाउंडेशन समेत अन्य सहयोगी संस्थाएं भी इस प्रयास से जुड़ी हैं।
केंद्र के माध्यम से ग्रामीण भारत के बच्चों को खेल के साथ बेहतर शिक्षा और प्रशिक्षण का अवसर देने की योजना है। आयोजकों का मानना है कि खेलों की सबसे बड़ी विरासत केवल जीते गए पदक नहीं, बल्कि भविष्य के लिए तैयार किए गए चैंपियन होते हैं। कन्हौली में प्रस्तावित यह केंद्र इसी सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

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