अनुदेशक मनोज भाटिया ने फैसले का किया स्वागत, सरकार से नियमितीकरण समेत अन्य आदेश लागू करने की मांग
रुद्रपुरदेवरिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर उत्तर प्रदेश के अनुदेशक/शिक्षकों ने खुशी इजहार किया है गुरुवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने 4 फरवरी 2026 के अपने पूर्व निर्णय को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि फैसले में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। साथ ही, राज्य सरकार की ओपन कोर्ट में सुनवाई की मांग वाली अर्जी भी खारिज कर सभी लंबित प्रार्थना पत्रों का निस्तारण कर दिया।
फैसले के बाद प्रदेशभर के अनुदेशकों में खुशी का माहौल है। अनुदेशक मनोज भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायालय ने अनुदेशकों के अधिकारों की रक्षा की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश सरकार जिस प्रकार बढ़ा हुआ मानदेय लागू कर चुकी है, उसी प्रकार न्यायालय के अन्य आदेशों का भी शीघ्र अनुपालन करेगी।
गौरतलब है कि वर्ष 2017 में अनुदेशकों का मानदेय 8,470 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह किया गया था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद बढ़ा हुआ मानदेय लागू नहीं किया गया। इसके खिलाफ अनुदेशकों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। पहले लखनऊ हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिली।फैसले के बाद प्रदेशभर के अनुदेशकों में खुशी का माहौल है।
इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री धर्मेंद्र सिंह, नौशाद अली, अमरेश कुमार, शिवाजी यादव, सत्य प्रकाश शर्मा, सत्येंद्र यादव, सुनीता रावत, रंभा देवी, धर्मेंद्र सोनकर और मिथिलेश कुमारी सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।

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